अमेरिकी कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण समिति के द्वारा 10 दिसंबर को एक सार्वजनिक सुनवाई का आयोजन किया जाएगा जिसमें भारत और अमेरिका के बीच होने वाले रणनीतिक साझेदारी में रक्षा सहयोग आर्थिक साझेदारी और कूटनीतिक तालमेल जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर खास फोकस रहेगा।
हिंद–प्रशांत में भारत की भूमिका पर विशेष चर्चा
हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की साउथ एंड सेंट्रल एशिया सब-कमेटी के द्वारा जारी किए गए आधिकारिक नोटिस के मुताबिक मिशिगन से रिपब्लिकन सांसद बिल ह्यूजेंगा की अध्यक्षता वाली यह सब-कमेटी विशेषज्ञ के अगुवाई में सुनवाई का विषय “अमेरिका–भारत रणनीतिक साझेदारी: स्वतंत्र और खुले हिंद–प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा” रखा गया है।
रक्षा आधुनिकीकरण और तकनीकी सहयोग पर विस्तृत मंथन
सुनवाई में जिन विशेषज्ञों को बुलाया गया है, उनमें शामिल हैं:
- जेफ स्मिथ, डायरेक्टर – एशियन स्टडीज सेंटर, हेरिटेज फाउंडेशन
- ध्रुव जयशंकर, कार्यकारी निदेशक – ORF अमेरिका
- समीर लालवानी, सीनियर फेलो – जर्मन मार्शल फंड (US)
ये तीनों विशेषज्ञ वॉशिंगटन डीसी में भारतीय मामले और इंडो पेसिफिक रणनीति सें जूरे विषय पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। बैठक में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा आधुनिकरण और सैन्य अभ्यास उभरती तकनीकी में सहयोग क्षेत्रीय कूटनीति और इंडो पेसिफिक में नियम आधारित व्यवस्था को को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।
अमेरिकी कांग्रेस से मिल रहा लगातार समर्थन
यह महत्वपूर्ण बैठक दोनों देशों के बीच समुद्री रक्षा महत्वपूर्ण तकनीकी और सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने के दिशा में संयुक्त पहल कर रहा है । इस बैठक में अमेरिकी कांग्रेस ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की रणनीति में भारत की भूमिका निर्णायक है।
जो संसदीय समिति के समीक्षा में संसदीय नीति के नई चुनौतीयो के आकलन करने के लिए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाएं रखने में मदद करेगा ।
ICET के तहत तेज हुआ टेक्नोलॉजी सहयोग
हाल के वर्षों में ICET (Initiative on Critical and Emerging Technologies) के तहत भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी सहयोग में उल्लेखनीय तेजी आई है। इस पहल के माध्यम से दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर चिप निर्माण और रक्षा क्षेत्र में इनोवेशन जैसी उभरती तकनीकों में अपनी साझेदारी का विस्तार कर रहे हैं।
हिंद और प्रशांत महासागर के क्षेत्र में बढ़ते हुए रणनीतिक चुनौतियों के लिए वाशिंगटन के लिए भारत की कूटनीतिक और सुरक्षा भूमिका और अधिक अहम होती जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में निर्धारित की गई है, जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं, जहाँ वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर वार्ता में हिस्सा ले रहे हैं।



