
ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान पार्किंसंस बीमारी से जुड़े एक महत्वपूर्ण खोज की है। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह बीमारी दिमाग के रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) में धीरे-धीरे बड़े स्तर पर बदलाव लाती है ।
वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि यह खोज न्यूरोलॉजिकल से जुड़े समस्याओं के उपचार को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है।
न्यूरोसाइंस रिसर्च ऑस्ट्रेलिया (NeuRA) ने मंगलवार को अपना बयान देते हुए कहा कि पार्किंसंस बीमारी आमतौर पर मनुष्य के दिमाग में अल्फा-सिन्यूक्लीन प्रोटीन के जमा होने से होता है।
फिलहाल एक ताजा अनुसंधान के बाद यह बताया गया कि दिमाग के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले वैस्कुलर परिवर्तन भी बीमारी के बढ़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
वही इस स्टडी का नेतृत्व कर रहे NeuRA की पोस्टडॉक्टरल रिसर्चर डेर्या डिक ने बताया कि अब तक पार्किंसंस पर हुए सभी रिसर्च ज्यादातर दिमाग में जमा होने वाले प्रोटीन और न्यूरोनल डैमेज पर आधारित थी उनकी टीम ने ये दिखाया कि बीमारी दिमाग की रक्त वाहिकाओं पर भी गहरा असर डालती है।
उन्होंने कहा,
“हमारी स्टडी में ब्रेन वेसल्स में कई तरह के खास बदलाव देखे गए, जिनमें ‘स्ट्रिंग वेसल्स’ की बढ़ी हुई मौजूदगी शामिल है। यह कैपिलरी के ऐसे हिस्से होते हैं जो अब सही तरीके से काम नहीं करते।”
ब्रेन जर्नल में प्रकाशित हुए एक शोध रिपोर्ट में NeuRA के वैज्ञानिकों ने, यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू साउथ वेल्स और यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिडनी के सभी शोधकर्ताओं ने दिमाग के ब्लड फ्लो और ब्लड-ब्रेन बैरियर की कार्यक्षमता में होने वाले बदलाव दर्ज किए हैं।
हालांकि शोधकर्ताओं का यह मानना है कि रीजन-विशिष्ट वैस्कुलर में बदलावों करने से भविष्य में इस तरह के बीमारियों के इलाज संभव हो सकते हैं। ताकि एसे बीमारियों में मरीज के जीवन में सुधार आए
अभी शोधकर्ताओं के टीम ये देखने में लगे हुए है कि लेवी बॉडी डिमेंशिया और अल्जाइमर से जुड़े पोस्टमॉर्टम ब्रेन टिश्यू में बदलाव हो रहे हैं या नहीं
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) का ये मानना है कि पार्किंसंस एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी हैं। जो इंसानो के शरीर में होने वाले मूवमेंट मानसिक स्वास्थ्य, नींद, दर्द और कई अन्य शारीरिक कार्यों को प्रभावित करती है।
यह बीमारी समय के साथ बढ़ती जाती है और इसका कोई स्थायी इलाज मौजूद नहीं है, हालांकि दवाइयों और थेरेपी से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
पार्किंसंस के आम लक्षणों में कंपकंपी, मांसपेशियों में जकड़न, चाल और बोलने में परेशानी शामिल हैं। कई मामलों में मरीजों को आगे चलकर डिमेंशिया का भी खतरा हो सकता है।
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