टेक्नोलॉजी डेस्क दिल्ली :- भारत और यूरोपीय संघ के बीच बुधवार को (EU) ने अगली 6G डिजिटल तकनीकी खासकर दूर संचार के मामले में आपसी रणनीतिक सहयोग को लेकर चर्चा हुई जिसमें भारत ने कहा कि इस साझेदारी का फोकस सुरक्षित और भरोसेमंद नेटवर्क के साथ वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को और भी मजबूत करना है ।
यह सहयोग फरवरी 2025 में यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और EU कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स की भारत यात्रा के दौरान जारी लीडर्स स्टेटमेंट में तय साझा दृष्टिकोण के अनुरूप है। जिसका उद्देश्य भविष्य में सुरक्षित और इंटर ऑपरेबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना है।
इस मुद्दे को लेकर यूरोपीय संघ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच EU व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) के तहत उन्नत तकनीकी को बढ़ावा देने के लिए और टेलीकॉम, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक तकनीकी में मजबूती प्रदान करने के लिए स्वागत किया गया है ।
यह समझौता भारत के लिए 6G अलायंस और यूरोपीय संघ के सपोर्ट के साथ 6G स्मार्ट नेटवर्क एंड सर्विसेज इंडस्ट्री एसोसिएशन (6G SNS IA) के बीच सहयोग को सुरक्षित और भरोसेमंद 6G नेटवर्क के दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो कि देश के लिए लचीली और विविध दूरसंचार सप्लाई चेन विकसित करने में मदद करेगा ।
इस संयुक्त पहल के साथ भारत अब 6G टेक्नोलॉजी के अनुसंधान, विकास, परीक्षण और मानकी करण से मिलकर एक साथ काम कर सके जिस पर दोनों पक्षों ने ऐसे मानको को विकसित करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है जिससे नवाचार, प्रतिस्पर्धा और समावेशी डिजिटल विकास को समर्थन मिले ।
भारत ने इस साझेदारी को राष्ट्रीय 6G विजन जिसे दूरसंचार के द्वारा संचालित किया जा रहा है इसके अनुरूप इसका उद्देश्य भारत को आने वाले समय में संचार तकनीकी के मामले में खुद को वैश्विक लीडर और योगदानकर्ता के रूप उभारना है ।
हालांकि अधिकारियों के अनुसार यह नागरिक और उद्योग को दोनों के लिए सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित करेगा।
भारत और EU के बीच हुए सहयोग समझौते को 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में मंज़ूर संयुक्त भारत-EU व्यापक रणनीतिक एजेंडा 2030 से भी जोड़ा गया है। इस एजेंडे का लक्ष्य सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और भरोसेमंद टेलीकॉम इकोसिस्टम पर सहयोग को और गहरा करना है।
इसके तहत भारत 6G अलायंस और EU के 6G SNS IA के बीच हुआ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) 6G विज़न, नेटवर्क आर्किटेक्चर, यूज़-केस और बियॉन्ड-5G व 6G टेक्नोलॉजी के लिए साझा वैश्विक स्तर पर सहयोग का ढांचा प्रदान करता है। जीससे भारतीय और यूरोपीय रिसर्च संस्थानों तथा इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स के बीच साझेदारी को भी बढ़ावा मिलेगा।
इससे पहले भी भारत 6G इंटरनेशनल सिम्पोज़ियम 2025 में भारत 6G अलायंस, 6GIA और ATIS नेक्स्ट-G अलायंस सहित वैश्विक टेक्नोलॉजी संगठनों ने “नई दिल्ली घोषणा” जारी की थी, जिसमें 6G को एक ग्लोबल पब्लिक गुड के रूप में विकसित करने का साझा विज़न प्रस्तुत किया गया था।
EU ने कहा कि एडवांस टेलीकम्युनिकेशन के क्षेत्र में भारत अब मजबूत साझेदारी के साथ सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से मज़बूत वैश्विक डिजिटल इकोसिस्टम बनाने की दिशा में अहम कदम है जो देश के नागरिकों उद्योग और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लाभ पहुंचाएगा ।



